1857 के विद्रोह के बाद ब्रिटिशों ने भारत में अपनी नीति बदली। विजय और विलय की जगह अब नियंत्रित प्रशासन, कानून और गठबंधनों ने ली। इस व्यवस्था की नींव मुख्य रूप से सिविल सेवा, सेना और पुलिस पर टिकी थी, बाद में न्यायिक सुधार भी जोड़े गए। उद्देश्य था कानून-व्यवस्था बनाए रखना और ब्रिटिश प्रभुत्व कायम रखना।
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1857 विद्रोह के बाद ब्रिटेन ने विलय नीति छोड़ी, सहयोग अपनाया
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1858 के अधिनियम से भारतीय राजाओं को सम्मान, अधिकार, सीमित स्वायत्तता
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कॉर्नवालिस ने सिविल सेवा बनाई, 1853 से प्रतियोगी परीक्षा लागू
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भारतीयों को बाहर रखा गया; प्रशिक्षण फोर्ट विलियम, हेलीबरी कॉलेज में
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सेना ब्रिटिश शासन की रीढ़, सभी अधिकारी ब्रिटिश; भारतीय शक्तियों को दबाया
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तकनीकी बदलाव से घुड़सवार सेना घटी, बंदूकें व राइफलें प्रमुख हुईं
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पुलिस प्रणाली कॉर्नवालिस ने बनाई; स्थायी पुलिस, दरोगा-थाने
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न्यायिक सुधार: दीवानी अदालतें, सर्किट कोर्ट; 1865 में उच्च न्यायालय स्थापित
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लॉ कमीशन (1833) ने भारतीय कानून संहिताबद्ध किए
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‘रूल ऑफ लॉ’ और कानून के समक्ष समानता शुरू, पर यूरोपियों के लिए अलग अदालतें
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न्याय महंगा, धीमा, आम भारतीयों की पहुँच से दूर
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उद्देश्य: व्यापार हेतु कानून-व्यवस्था और भारत पर प्रभुत्व बनाए रखना
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बाद के सुधार: भारतीय परिषद अधिनियम, मॉर्ले-मिंटो (1909), मांटेग-चेम्सफोर्ड (1919), भारत सरकार अधिनियम (1935)
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विरासत: लोक सेवा आयोग, जिला कलेक्टर, स्थानीय स्वशासन आज भी जारी





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