राष्ट्रीय महासागर प्रौद्योगिकी संस्थान ने राष्ट्रीय तकनीकी प्रतियोगिता प्रारंभ की है, जिसका उद्देश्य गहरे समुद्र से बहुधात्विक पिंडों के सतत संग्रह के लिए स्वदेशी प्रौद्योगिकी विकसित करना है। यह पहल गहरे समुद्र अभियान और नीली अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
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- राष्ट्रीय महासागर प्रौद्योगिकी संस्थान ने 3 अगस्त 2026 को राष्ट्रीय तकनीकी प्रतियोगिता प्रारंभ की, जिसका उद्देश्य गहरे समुद्र से बहुधात्विक पिंडों के सतत संग्रह के लिए स्वदेशी प्रौद्योगिकी विकसित करना है।
- 1993 में स्थापित और चेन्नई स्थित यह संस्थान पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के अधीन कार्य करता है तथा महासागर प्रौद्योगिकी, समुद्री अभियांत्रिकी और गहरे समुद्र अनुसंधान में विशेषज्ञता रखता है।
- इस प्रतियोगिता में नवप्रवर्तन उद्यम, उद्योग, सूक्ष्म लघु एवं मध्यम उद्यम, शैक्षणिक संस्थान, अनुसंधान संगठन, नवप्रवर्तक तथा बहुविषयक दलों को भाग लेने के लिए आमंत्रित किया गया है।
- प्रतियोगिता का उद्देश्य 4500 से 6000 मीटर की समुद्री गहराई पर कार्य करने वाली पर्यावरण अनुकूल और प्रभावरहित प्रौद्योगिकी विकसित करना है।
- प्रतियोगिता में ऊर्ध्व परिवहन प्रणाली सहित प्रभावरहित बहुधात्विक पिंड संग्रह प्रणाली तथा ऊर्ध्व परिवहन प्रणाली के बिना प्रभावरहित संग्रह प्रणाली जैसी दो प्रमुख श्रेणियां निर्धारित की गई हैं।
- बहुधात्विक पिंड, जिन्हें मैंगनीज पिंड भी कहा जाता है, में निकेल, कोबाल्ट, तांबा और मैंगनीज जैसे महत्वपूर्ण खनिज पाए जाते हैं, जिनका उपयोग विद्युत वाहन और उन्नत बैटरी निर्माण में होता है।
- यह पहल गहरे समुद्र अभियान को गति देने के साथ समुद्री संसाधन अन्वेषण, समुद्री प्रौद्योगिकी विकास तथा भारत की सामरिक समुद्री क्षमता को मजबूत करेगी।
- यह प्रतियोगिता नीली अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देते हुए समुद्री संसाधनों के सतत उपयोग, समुद्रतल खनिज अनुसंधान तथा महत्वपूर्ण खनिजों में आत्मनिर्भरता को प्रोत्साहित करेगी।





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