2017 में लागू वस्तु एवं सेवा कर (GST) ने भारत की अप्रत्यक्ष कर प्रणाली को पूरी तरह बदल दिया। इसने कई केंद्रीय और राज्य करों को समाप्त कर एक एकीकृत राष्ट्रीय कर ढांचा स्थापित किया, जिसका उद्देश्य “एक राष्ट्र, एक कर” की अवधारणा को लागू करना था।
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- जीएसटी 2017 में लागू किया गया था और इसने कई अप्रत्यक्ष करों को समाप्त कर भारत में एकीकृत राष्ट्रीय कर प्रणाली स्थापित की
- इस सुधार ने करों के दोहराव को समाप्त किया, पारदर्शिता बढ़ाई और राज्यों के बीच वस्तुओं और सेवाओं के निर्बाध आवागमन को संभव बनाया
- जीएसटी परिषद के माध्यम से केंद्र और राज्यों के बीच सहयोग मजबूत हुआ और निर्णय प्रक्रिया सहमति आधारित बनी रही
- ऑनलाइन पंजीकरण, रिटर्न दाखिल करना, ई-इनवॉइसिंग और डिजिटल भुगतान जैसी तकनीकी प्रणालियों ने कर अनुपालन को सरल बनाया
- डिजिटल जीएसटी प्रणाली ने दक्षता बढ़ाई, कर प्रशासन में पारदर्शिता लाई और कर आधार को व्यापक बनाने में मदद की
- वर्ष 2025 में शुरू किए गए अगली पीढ़ी के जीएसटी सुधारों ने कर दरों को सरल और अनुपालन प्रक्रिया को अधिक सुगम बनाया
- इन सुधारों का उद्देश्य विशेष रूप से सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों पर अनुपालन बोझ को कम करना है
- जीएसटी ने केंद्र और राज्यों के बीच सहकारी संघवाद को मजबूत किया है और कर प्रणाली को अधिक संतुलित बनाया है
- इस प्रणाली ने निवेश को प्रोत्साहित किया, राजस्व दक्षता में सुधार किया और व्यवसायिक वातावरण को प्रतिस्पर्धी बनाया है
- जीएसटी भारत की आर्थिक वृद्धि में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है और डिजिटल एवं समावेशी विकास को बढ़ावा दे रहा है





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