अघारकर अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिकों ने फोरामिनिफेरा की नई प्रजाति की खोज की है, जो भारत की समृद्ध समुद्री जैव विविधता को दर्शाती है।
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- पुणे स्थित अघारकर अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिकों ने फोरामिनिफेरा की नई प्रजाति पोर्टाट्रोचामिना भारतेन्सिस की खोज महाराष्ट्र के कोंकण तट पर की है।
- यह प्रजाति रत्नागिरी जिले के जैतापुर क्रीक के समुद्री अवसादों में पाई गई और इसका नाम भारत के प्राचीन नाम ‘भारत’ के सम्मान में रखा गया है।
- फोरामिनिफेरा एककोशिकीय समुद्री जीव हैं जो 500 मिलियन वर्षों से अधिक समय से महासागरों में मौजूद हैं और समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
- पोर्टाट्रोचामिना भारतेन्सिस का आकार केवल 0.3 से 0.5 मिलीमीटर है, इसलिए यह नग्न आंखों से दिखाई नहीं देती।
- यह सूक्ष्म जीव क्वार्ट्ज रेत के अत्यंत छोटे कणों को जोड़कर अपना मजबूत सुरक्षात्मक खोल तैयार करता है।
- वैज्ञानिकों ने 18S राइबोसोमल आरएनए जीन की डीएनए अनुक्रमण तकनीक का उपयोग कर इसे एक नई प्रजाति के रूप में प्रमाणित किया।
- आनुवंशिक विश्लेषण में यह प्रजाति पोर्टाट्रोचामिना पैसिफिका और पोर्टाट्रोचामिना अंटार्कटिका से संबंधित पाई गई, लेकिन इसकी अपनी विशिष्ट पहचान है।
- यह खोज भारत के तटीय क्षेत्रों में मौजूद विशाल लेकिन कम अध्ययन की गई सूक्ष्म जैव विविधता को समझने और संरक्षण प्रयासों को मजबूत करने में मदद करेगी।





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