सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम, 2005 नागरिकों को सरकारी विभागों से जानकारी प्राप्त करने का अधिकार देता है, जिससे शासन में पारदर्शिता और जवाबदेही मजबूत होती है।
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- RTI अधिनियम, 2005 नागरिकों को सरकारी संस्थाओं से जानकारी मांगने का अधिकार देता है ताकि पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित हो सके।
- यह कानून आमतौर पर 30 दिनों के भीतर सूचना उपलब्ध कराने का प्रावधान करता है।
- इसे कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) द्वारा लागू किया गया है।
- इसमें तीन स्तर की व्यवस्था है—लोक सूचना अधिकारी, प्रथम अपीलीय प्राधिकारी और सूचना आयोग।
- 2019 के संशोधन अधिनियम ने सूचना आयुक्तों के कार्यकाल और वेतन से जुड़े प्रावधानों में बदलाव किया।
- यह सभी सरकारी और सार्वजनिक संस्थानों पर लागू होता है, जबकि कुछ सुरक्षा एजेंसियाँ इसके दायरे से बाहर हैं।
- इस अधिनियम ने भ्रष्टाचार को कम करने और नागरिकों को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
- हालांकि इसमें देरी, लंबित मामलों और जागरूकता की कमी जैसी चुनौतियाँ भी मौजूद हैं।





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