Indian Federal System भारत की ऐसी शासन व्यवस्था है जिसमें केंद्र और राज्यों के बीच शक्तियों का विभाजन किया गया है ताकि राष्ट्रीय एकता और क्षेत्रीय विविधता दोनों बनी रहें।
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- भारत में केंद्र और राज्यों के बीच शक्तियों का विभाजन आधारित संघीय व्यवस्था लागू है।
- यह व्यवस्था देश की विशालता और विविधता को ध्यान में रखकर बनाई गई।
- Article 1 भारत को “राज्यों का संघ” बताता है।
- भारतीय संघीय व्यवस्था मुख्य रूप से कनाडाई मॉडल से प्रेरित है।
- अमेरिका के विपरीत भारतीय राज्यों को अलग होने का अधिकार नहीं है।
- भारतीय संविधान में संघीय और एकात्मक दोनों प्रकार की विशेषताएं हैं।
- लिखित संविधान, शक्तियों का विभाजन और स्वतंत्र न्यायपालिका संघीय विशेषताएं हैं।
- मजबूत केंद्र, एकल नागरिकता और आपातकालीन प्रावधान एकात्मक विशेषताएं हैं।
- विशेष परिस्थितियों में संसद को अधिक शक्तियां प्राप्त हो जाती हैं।
- सुप्रीम कोर्ट ने भारत को मजबूत केंद्र वाला संघीय ढांचा बताया है।
- डॉ. बी. आर. आंबेडकर ने भारत को अविभाज्य संघ कहा था।
- ग्रैनविल ऑस्टिन ने भारतीय संघवाद को “सहकारी संघवाद” कहा।
- केसी व्हीयर ने भारत को “अर्ध-संघीय राज्य” बताया।
- नदी जल, सीमाओं और संसाधनों को लेकर राज्यों के विवाद संघवाद को दर्शाते हैं।
- क्षेत्रीय दलों के उभार ने भारतीय संघवाद को और मजबूत किया।
- नए राज्यों का गठन क्षेत्रीय आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए किया गया।
- स्वतंत्र न्यायपालिका केंद्र और राज्यों के बीच संतुलन बनाए रखती है।
- मौलिक अधिकार सरकार की शक्तियों को सीमित करते हैं।
- भारतीय संघवाद का उद्देश्य एकता बनाए रखते हुए विविधता का सम्मान करना है।





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