गोपाल हरि देशमुख, जिन्हें लोकहितवादी के नाम से जाना जाता है, समाज सुधार, महिला शिक्षा और तार्किक धार्मिक विचारों के प्रमुख समर्थक थे।
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- गोपाल हरि देशमुख, जिन्हें लोकहितवादी के नाम से भी जाना जाता है, उन्नीसवीं शताब्दी के प्रमुख समाज सुधारक, लेखक और न्यायाधीश थे।
- देशमुख ने जातिवाद, बाल विवाह, दहेज प्रथा, सती प्रथा, विधवा उत्पीड़न और सामाजिक रूढ़ियों का खुलकर विरोध किया।
- उन्होंने महिला शिक्षा, विधवा पुनर्विवाह, सामाजिक समानता और तार्किक सोच को बढ़ावा देने के लिए व्यापक सामाजिक अभियान चलाए।
- वर्ष 1848 से उन्होंने मराठी पत्रिका प्रभाकर में धर्म, राजनीति, समाज, शिक्षा और अर्थव्यवस्था पर सुधारवादी लेख प्रकाशित किए।
- उनकी प्रसिद्ध रचना लोकहितवादिंची शतपत्रे में 108 लेख शामिल थे जो स्वतंत्र विचार और सामाजिक सुधार को प्रोत्साहित करते थे।
- देशमुख का मानना था कि धर्म को बदलते सामाजिक परिवेश के अनुसार विकसित होना चाहिए और अंधविश्वास का विरोध आवश्यक है।
- गुजरात में उन्होंने गुजराती प्रार्थना समाज और गुजराती पुनर्विवाह संस्था की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
- उन्होंने पुस्तकालय स्थापित कर, बॉम्बे विश्वविद्यालय को सहयोग देकर और शिक्षा को बढ़ावा देकर समाज में बौद्धिक जागरूकता फैलाने का कार्य किया।





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