भारत ने पेरिस समझौते के तहत नए जलवायु लक्ष्य प्रस्तुत किए, जिनमें स्वच्छ ऊर्जा विस्तार, उत्सर्जन में कमी और वन क्षेत्र बढ़ाकर कार्बन सिंक विकसित करने पर जोर दिया गया है।
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- संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन रूपरेखा अभिसमय को भारत ने 2031–35 अवधि के लिए अपने अद्यतन राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (NDC) प्रस्तुत किए हैं।
- भारत ने 2035 तक अपनी कुल बिजली क्षमता का 60% गैर-जीवाश्म ईंधन स्रोतों से प्राप्त करने का लक्ष्य रखा है, जिससे स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा मिलेगा।
- भारत ने 2005 के स्तर की तुलना में 2035 तक जीडीपी की उत्सर्जन तीव्रता को 47% तक कम करने का संकल्प लिया है।
- देश ने 2035 तक वन और वृक्ष आवरण बढ़ाकर 3.5 से 4 अरब टन CO₂ के बराबर कार्बन सिंक बनाने का लक्ष्य भी निर्धारित किया है।
- भारत ने स्पष्ट किया कि इन लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए विकसित देशों से वित्तीय सहायता, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और क्षमता निर्माण आवश्यक है।
- भारत ने चेतावनी दी कि यदि विकसित देश अपनी जिम्मेदारियां पूरी नहीं करते, तो वैश्विक जलवायु लक्ष्यों में “ambition gap” पैदा हो सकता है।
- जलवायु रणनीति में सतत जीवनशैली, संस्थागत विकास और कृषि, जल, स्वास्थ्य तथा तटीय क्षेत्रों में अनुकूलन उपायों को भी शामिल किया गया है।
- भारत ने बताया कि 2026 तक 52.5% बिजली क्षमता गैर-जीवाश्म स्रोतों से आ रही है और 2005–2020 के बीच उत्सर्जन तीव्रता में 36% कमी हासिल की गई है।





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