भारत सरकार अधिनियम 1919, जिसे मॉन्टेग्यू-चेम्सफोर्ड सुधार कहा जाता है, ने सीमित स्वशासन की शुरुआत की और प्रशासन में भारतीयों की भागीदारी बढ़ाई।
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- भारत सरकार अधिनियम 1919, जिसे मॉन्टेग्यू-चेम्सफोर्ड सुधार कहा जाता है, एडविन मॉन्टेग्यू और लॉर्ड चेम्सफोर्ड की सिफारिशों पर आधारित था।
- इस अधिनियम ने प्रांतों में द्वैध शासन (Dyarchy) की शुरुआत की, जिसमें विषयों को आरक्षित और स्थानांतरित श्रेणियों में विभाजित किया गया।
- प्रशासनिक विषयों को केंद्रीय और प्रांतीय सूची में बांटा गया, जिससे केंद्र से प्रांतों को सीमित अधिकार हस्तांतरित किए गए।
- पहली बार केंद्र में द्विसदनीय विधानमंडल की स्थापना हुई, जिसमें राज्य परिषद (ऊपरी सदन) और विधानसभा (निचला सदन) शामिल थे।
- इस अधिनियम ने प्रशासन में भारतीयों की भागीदारी बढ़ाई, हालांकि वास्तविक शक्ति ब्रिटिश अधिकारियों के पास ही रही।
- इसमें सिख, भारतीय ईसाई, एंग्लो-इंडियन और यूरोपीय समुदायों के लिए पृथक निर्वाचन प्रणाली का विस्तार किया गया।
- मतदान का अधिकार संपत्ति, कर और शिक्षा के आधार पर सीमित लोगों को दिया गया, जिससे आम जनता इससे वंचित रही।
- इस अधिनियम ने आगे के संवैधानिक सुधारों की नींव रखी, जिससे बाद में साइमन कमीशन और 1935 का अधिनियम अस्तित्व में आया।





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