भारत और रूस ने अप्रैल 2026 में रिलेस समझौते को लागू किया, जिससे सैन्य लॉजिस्टिक्स सहयोग बढ़ा, इंटरऑपरेबिलिटी मजबूत हुई और आर्कटिक सहित वैश्विक रणनीतिक पहुंच का विस्तार हुआ।
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- भारत और रूस ने अप्रैल 2026 में Reciprocal Exchange of Logistics Agreement (RELOS) को लागू किया, जिसे फरवरी 2025 में हस्ताक्षरित किया गया था, जिससे रक्षा सहयोग को नई दिशा मिली।
- इस समझौते के तहत दोनों देशों को एक-दूसरे के सैन्य ठिकानों, नौसैनिक बंदरगाहों और हवाई अड्डों तक पहुंच मिलेगी, जिससे लॉजिस्टिक सपोर्ट और ऑपरेशनल क्षमता बेहतर होगी।
- RELOS के तहत दोनों देश 3,000 तक सैन्य कर्मियों की तैनाती कर सकते हैं, साथ ही पांच युद्धपोत और दस लड़ाकू विमान भी तैनात किए जा सकते हैं।
- यह समझौता पांच वर्षों के लिए मान्य है और इसके विस्तार का प्रावधान भी है, जिससे दीर्घकालिक रणनीतिक सहयोग सुनिश्चित होता है।
- यह समझौता इंटरऑपरेबिलिटी को मजबूत करता है, जिससे संयुक्त अभियानों, मानवीय मिशनों और सुरक्षा चुनौतियों में तेज प्रतिक्रिया संभव होती है।
- भारत को रूस के प्रमुख आर्कटिक बंदरगाहों जैसे मुरमान्स्क और सेवेरेमोर्स्क तक पहुंच मिलेगी, जिससे वैश्विक समुद्री और ऊर्जा मार्गों में उपस्थिति बढ़ेगी।
- आर्कटिक क्षेत्र का महत्व बढ़ रहा है क्योंकि बर्फ पिघलने से नए समुद्री मार्ग खुल रहे हैं, वैश्विक प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है और ऊर्जा संसाधनों की अहमियत बढ़ रही है।
- RELOS समझौता भारत-रूस रक्षा संबंधों को और मजबूत करता है, जिससे सहयोग केवल खरीद और अभ्यास तक सीमित न रहकर वास्तविक ऑपरेशनल और लॉजिस्टिक समर्थन तक पहुंचता है।





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