वैज्ञानिकों ने एक नए प्रकार के द्रव ग्रह की खोज की है, जहां अत्यधिक तापमान, लावा महासागर और सल्फर युक्त विषैला वायुमंडल पाया गया है।
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- वैज्ञानिकों ने बाह्य ग्रहों की एक नई श्रेणी की पहचान की है जिसे द्रव ग्रह कहा जा रहा है, जो ठोस या जल ग्रहों से बिल्कुल अलग हैं।
- एल 98-59 डी नामक यह ग्रह लगभग पैंतीस प्रकाश वर्ष दूर स्थित है और इसे अत्याधुनिक अंतरिक्ष दूरबीन की सहायता से खोजा गया है।
- इस ग्रह की सतह का तापमान लगभग उन्नीस सौ डिग्री सेल्सियस तक पहुंचता है, जिससे इसकी पूरी सतह पिघले हुए लावा के महासागर में बदल जाती है।
- इसके वायुमंडल में हाइड्रोजन सल्फाइड गैस की अधिक मात्रा मौजूद है, जिससे सड़े अंडे जैसी तीव्र और असहनीय गंध उत्पन्न होती है।
- आसपास के ग्रहों के गुरुत्वाकर्षण प्रभाव के कारण ज्वारीय ऊष्मा उत्पन्न होती है, जिससे लावा महासागर में विशाल तरंगें बनती हैं और ग्रह ठंडा नहीं हो पाता।
- वैज्ञानिकों के अनुसार अत्यधिक घना वायुमंडल ऊष्मा को बाहर निकलने से रोकता है, जिससे ग्रीनहाउस प्रभाव बना रहता है और ग्रह लगातार पिघली अवस्था में रहता है।
- यह खोज पारंपरिक ग्रह वर्गीकरण को चुनौती देती है और संकेत देती है कि कई तथाकथित जल ग्रह वास्तव में लावा से भरे हो सकते हैं।
- ऐसे ग्रह प्रारंभिक पृथ्वी जैसी परिस्थितियों को समझने में सहायक हैं और जीवन योग्य ग्रहों की खोज में भ्रमित करने वाले संकेतों की पहचान करने में मदद करते हैं।





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