भारत में लोक सेवा आयोग नागरिक सेवाओं की भर्ती प्रक्रिया संचालित करते हैं। संविधान के अनुच्छेद 315 से 323 के अंतर्गत ये संस्थाएँ योग्यता आधारित चयन और पारदर्शी प्रशासन सुनिश्चित करती हैं।
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संविधान के अनुच्छेद 315 से 323 के अंतर्गत संघ लोक सेवा आयोग और राज्य लोक सेवा आयोग स्थापित किए गए, जो स्वतंत्र और योग्यता आधारित भर्ती प्रणाली सुनिश्चित करते हैं।
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संघ लोक सेवा आयोग केंद्र सरकार की सेवाओं के लिए भर्ती परीक्षाएँ आयोजित करता है, जबकि राज्य लोक सेवा आयोग राज्य प्रशासनिक सेवाओं के लिए चयन प्रक्रिया संचालित करते हैं।
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संघ लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष और सदस्य छह वर्ष या पैंसठ वर्ष आयु तक पद पर रहते हैं, जबकि राज्य लोक सेवा आयोग में यह अवधि छह वर्ष या बासठ वर्ष होती है।
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संघ लोक सेवा आयोग के सदस्यों की नियुक्ति और हटाने का अधिकार राष्ट्रपति के पास होता है, जबकि राज्य लोक सेवा आयोग के सदस्यों की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा की जाती है।
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आयोग सरकार को भर्ती विधियों, पदोन्नति सिद्धांतों, अनुशासनात्मक मामलों, सेवा विस्तार, एक वर्ष से अधिक अस्थायी नियुक्तियों और सरकारी कर्मचारियों के कानूनी व्यय संबंधी मामलों पर सलाह देता है।
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संघ और राज्य लोक सेवा आयोग की सिफारिशें सलाहात्मक होती हैं, और अस्वीकृति के मामलों को वार्षिक प्रतिवेदन के माध्यम से संसद या राज्य विधानमंडल के सामने प्रस्तुत किया जाता है।
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आयोगों की स्वतंत्रता बनाए रखने के लिए उनके वेतन, भत्ते और अन्य खर्च भारत की संचित निधि या संबंधित राज्य की संचित निधि से दिए जाते हैं।
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दो या अधिक राज्यों के अनुरोध पर संसद के कानून द्वारा संयुक्त राज्य लोक सेवा आयोग का गठन किया जा सकता है, जो साझा भर्ती प्रक्रिया संचालित करता है।





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