2022 में भारत में वायु प्रदूषण से जुड़ी 17.2 लाख मौतें हुईं, जो 2010 से 38% अधिक हैं। लैंसेट काउंटडाउन ऑन हेल्थ एंड क्लाइमेट चेंज की 2025 रिपोर्ट बताती है कि जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता और स्वच्छ ऊर्जा की धीमी गति देश में करोड़ों लोगों के जीवन और अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर रही है
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• 2022 में वायु प्रदूषण से 17.2 लाख मौतें, 2010 से 38% अधिक
• इन मौतों में लगभग आधी जीवाश्म ईंधन के कारण, 3.94 लाख केवल कोयले से
• बाहरी वायु प्रदूषण से आर्थिक नुकसान 339.4 अरब डॉलर (GDP का 9.5%)
• 2023 में जीवाश्म ईंधन पर 48.5 अरब डॉलर की सब्सिडी खर्च, कार्बन राजस्व से अधिक
• देश की 72% बिजली और आधी ऊर्जा अब भी कोयले से
• ग्रामीण घरों में 58% ऊर्जा लकड़ी, गोबर और फसल अवशेषों से
• 2024 में औसतन 19.8 हीटवेव दिन, जिनमें 6.6 मानवजनित जलवायु परिवर्तन के कारण
• श्रम घंटे का नुकसान 247 अरब, मूल्य 194 अरब डॉलर; कृषि क्षेत्र सबसे प्रभावित
• 1950 के दशक से गंभीर सूखे 138% बढ़े; एक-तिहाई भारत हर साल सूखा झेलता
• 1 मीटर समुद्र स्तर के भीतर 1.8 करोड़ लोग, तूफान और बाढ़ के जोखिम में
• स्वच्छ ऊर्जा तैयारी 2024 में 2% घटी; 96% सड़क परिवहन अब भी जीवाश्म ईंधन पर





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