74वाँ संविधान संशोधन अधिनियम, 1992 में पारित और 1 जून 1993 से लागू हुआ। इसने नगर निकायों (Urban Local Bodies) को संवैधानिक दर्जा दिया और शहरी प्रशासन में विकेंद्रीकरण तथा जनभागीदारी को बढ़ावा देने का लक्ष्य रखा।
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* 1992 में पारित, 1 जून 1993 से लागू।
* संविधान में भाग IXA (अनुच्छेद 243-P से 243-ZG) और बारहवीं अनुसूची जोड़ी गई।
* नगरपालिकाओं और शहरी शासन को संवैधानिक मान्यता दी गई।
* तीन प्रकार की नगरीय संस्थाएं निर्धारित — नगर पंचायत, नगरपालिका परिषद, नगर निगम।
* उद्देश्य: शक्तियों का विकेंद्रीकरण और शहरी विकास में स्थानीय निकायों की भूमिका बढ़ाना।
* नगरपालिकाओं में अनुसूचित जाति, जनजाति और 1/3 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित।
* राज्य निर्वाचन आयोग गठित कर निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित किए गए।
* वित्त आयोग का गठन कर राज्य और नगर निकायों के बीच राजस्व वितरण तय किया गया।
* जिला एवं महानगरीय योजना समितियों से समग्र शहरी योजना को बढ़ावा मिला।
* जमीनी स्तर पर लोकतंत्र की जड़ें मजबूत कर नागरिकों को शासन से जोड़ा गया





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