उत्तरी बांग्लादेश के कुरिग्राम ज़िले में हर साल सैकड़ों परिवार अपनी ज़मीन और घर खो देते हैं। ब्रह्मपुत्र, तीस्ता और धरला नदियाँ लगातार भूमि काट रही हैं। यह संकट जलवायु परिवर्तन का जीवंत उदाहरण बन चुका है, जबकि विश्व नेता ब्राज़ील में जलवायु शिखर सम्मेलन के लिए जुट रहे हैं।
- कुरिग्राम ज़िले में नदियों का कटाव हर साल सैकड़ों परिवारों को बेघर कर देता है।
- किसान नूरुन नबी और कोसिम उद्दीन जैसे लोग दर्जनों बार अपना घर खो चुके हैं।
- ब्रह्मपुत्र, तीस्ता और धरला नदियाँ अब पहले से तेज़ी से ज़मीन काट रही हैं।
- हिमालय की हिमनद पिघलने और अनियमित मानसून ने कटाव को और बढ़ा दिया है।
- * बांग्लादेश का वैश्विक उत्सर्जन में हिस्सा 0.5% से भी कम, फिर भी असर सबसे ज़्यादा।
- * 2050 तक हर सात में एक बांग्लादेशी जलवायु आपदाओं से विस्थापित हो सकता है (विश्व बैंक)।
- * महिलाएँ और बच्चे बार-बार विस्थापन से सबसे अधिक प्रभावित होते हैं।
- * जियाबैग्स और ऊँचे घरों जैसी स्थानीय पहलें कुछ इलाकों में मददगार साबित हुई हैं।
- * विशेषज्ञों ने COP30 में वास्तविक जलवायु वित्त और हानि-क्षति फंडिंग की माँग की।
- * विशेषज्ञ ऐनुन निशात ने कहा, “यह लोग उन उत्सर्जनों की कीमत चुका रहे हैं जो उन्होंने किए ही नहीं।”





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