हाल ही में हुए अध्ययन में लद्दाख के भूजल संसाधनों पर शहरीकरण, जनसंख्या वृद्धि और जलवायु परिवर्तन के गंभीर खतरे की ओर इशारा किया गया है। ये कारक पानी की मांग-आपूर्ति संतुलन को बाधित कर भूजल स्तर को प्रभावित कर रहे हैं।
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- लद्दाख में शहरीकरण, पर्यटन और जनसंख्या वृद्धि से भूजल संसाधनों पर दबाव बढ़ा।
- 2009 से 2020 के बीच भूजल निष्कर्षण 26% बढ़ा।
- 1650 के बाद से ग्लेशियरों का क्षेत्रफल 40% और आयतन 25% घटा, जिससे भूजल पुनर्भरण कम हुआ।
- 1901 में लेह की जनसंख्या 29,730 थी, जो 2020 में बढ़कर 152,175 हो गई, जिससे पानी की मांग बढ़ी।
- लद्दाख में वार्षिक वर्षा केवल 86.8 मिमी है, जिससे भूजल मुख्य जल स्रोत बन गया है।
- जलवायु परिवर्तन के कारण ग्लेशियरों का पिघलना और अनियमित बारिश पानी की उपलब्धता घटा रहे हैं।
- आधुनिक सीवेज सिस्टम से भूजल गुणवत्ता खराब हो रही है।
- कृत्रिम ग्लेशियर और स्नो स्तूप जैसे समाधान भूजल पुनर्भरण में मदद कर सकते हैं।
- सूखा-सहनशील फसलें और ड्रिप सिंचाई जैसी टिकाऊ कृषि तकनीकें जल संकट कम कर सकती हैं।
- विशेषज्ञ भूजल पर निगरानी, जलवायु और जल के संबंधों पर शोध और सामुदायिक जागरूकता की आवश्यकता पर जोर देते हैं।





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