संयुक्त राष्ट्र ने कोयला खदानों और कचरा स्थलों को मीथेन निगरानी व्यवस्था में शामिल किया है, क्योंकि भारत का एक कचरा स्थल दुनिया के सबसे बड़े उत्सर्जकों में पाया गया।
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- संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम ने अपनी मीथेन चेतावनी और प्रतिक्रिया व्यवस्था का विस्तार करते हुए कोयला खदानों और कचरा स्थलों को शामिल किया है।
- उपग्रह विश्लेषण में मुंबई के कांजुरमार्ग कचरा स्थल को दुनिया के तीन सबसे बड़े मीथेन उत्सर्जन स्थलों में शामिल पाए जाने के बाद यह कदम उठाया गया।
- मीथेन गैस बीस वर्षों की अवधि में कार्बन डाइऑक्साइड की तुलना में अस्सी गुना अधिक प्रभावशाली ग्रीनहाउस गैस मानी जाती है।
- यह निगरानी व्यवस्था पैंतीस से अधिक उपग्रहों के आंकड़ों का उपयोग करके बड़े मीथेन उत्सर्जन स्रोतों की पहचान करती है और संबंधित देशों को चेतावनी भेजती है।
- संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम द्वारा पहचाने गए शीर्ष पचास मीथेन उत्सर्जकों में बाईस कोयला खदानें और ग्यारह कचरा प्रबंधन स्थल शामिल थे।
- उपग्रह आधारित अध्ययन में सिकंदराबाद और मुंबई के कचरा स्थलों को दुनिया के पच्चीस सबसे बड़े मीथेन उत्सर्जन क्षेत्रों में शामिल किया गया।
- वर्ष 2023 में शुरुआत के बाद से इस व्यवस्था ने ग्यारह देशों में इकतालीस बड़े मीथेन उत्सर्जन स्रोतों की पहचान और नियंत्रण में सहायता की है।
- संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम और अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी ने उत्सर्जन नियंत्रण को मजबूत करने हेतु नई प्रतिक्रिया रूपरेखा और कोयला मीथेन आंकड़ा भंडार भी जारी किया है।





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