26 फरवरी, 1775 को सलेम, मैसाचुसेट्स में ब्रिटिश सैनिकों और उपनिवेशियों के बीच एक संघर्ष हुआ था, जो अमेरिकी क्रांति की शुरुआत से लगभग दो महीने पहले घटित हुआ था। इस घटना को “लेस्ली की वापसी” के नाम से जाना जाता है, जो उस समय के अमेरिकी उपनिवेशियों और ब्रिटिश सेना के बीच बढ़ते तनाव को दर्शाती है। यह संघर्ष अमेरिकी स्वतंत्रता की ओर बढ़ते कदमों का एक महत्वपूर्ण संकेत था।
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- 26 फरवरी, 1775 को ब्रिटिश लेफ्टिनेंट कर्नल अलेक्जेंडर लेस्ली ने सलेम में एक छापे का नेतृत्व किया, जिसका उद्देश्य उपनिवेशियों के हथियारों को जब्त करना था, लेकिन उसे उपनिवेशियों का विरोध झेलना पड़ा।
- उपनिवेशियों ने विरोध किया और लेस्ली को सलेम के रास्ते में रोक लिया, जिससे उसे वार्ता करनी पड़ी और उसे वापस बoston लौटने के लिए मजबूर होना पड़ा।
- यह संघर्ष सलेम के उत्तर पुल पर हुआ था, जहां ब्रिटिश सैनिकों ने अपनी bayonets के साथ आगे बढ़ने का प्रयास किया, लेकिन उपनिवेशी उनकी किसी भी कार्रवाई से डरते नहीं थे।
- लेस्ली का मिशन एक अस्थायी उपनिवेशी शस्त्रागार से तोपें जब्त करना था, लेकिन उपनिवेशियों ने पहले ही उन्हें छिपा लिया था।
- सलेम के निवासियों ने लेस्ली को चुनौती दी, लेकिन कोई गोलीबारी नहीं हुई, और अंत में उसे बoston वापस लौटने पर मजबूर किया गया।
- इस संघर्ष को सामान्य रूप से भुला दिया गया था, लेकिन 1856 में चार्ल्स मोसेस एंडिकॉट की किताब ने इसे पुनः जीवित किया और इसे ब्रिटिश सैन्य शक्ति के खिलाफ पहला प्रत्यक्ष प्रतिरोध माना।
- इस संघर्ष ने अमेरिकी उपनिवेशियों की बढ़ती असहमति और ब्रिटिश शासक के खिलाफ असंतोष को और बढ़ावा दिया।
- यह संघर्ष अमेरिका के स्वतंत्रता संग्राम की दिशा में एक अहम कदम था, जो बाद में लेक्सिंगटन और कॉनकॉर्ड की लड़ाई में बदल गया।
- 2025 में, सलेम ने लेस्ली की वापसी की 250वीं वर्षगांठ मनाई, जिससे यह संघर्ष स्वतंत्रता के लिए एक महत्वपूर्ण प्रतिरोध के रूप में याद किया गया।





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