डोनाल्ड ट्रंप की चुनावी जीत के बाद टाटा स्टील के एमडी टी.वी. नरेंद्रन ने कहा कि चीनी इस्पात निर्यात में संभावित कमी से वैश्विक इस्पात बाजार में भारतीय उत्पादकों को फायदा हो सकता है। उन्होंने कहा कि इस्पात उद्योग में लाभप्रदता केवल कीमतों में पर्याप्त सुधार के बाद ही आएगी, जो कि नई क्षमता विस्तार की योजनाओं को व्यावहारिक बना सकता है।
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- चीनी इस्पात निर्यात से वैश्विक कीमतों पर दबाव बनता है।
- ट्रंप की जीत चीन को निर्यात कम करने के लिए प्रेरित कर सकती है, जो अन्य देशों के लिए लाभदायक होगा।
- चीनी इस्पात निर्यात में कमी से वैश्विक स्तर पर कीमतें स्थिर हो सकती हैं।
- मौजूदा कीमतों पर चीनी इस्पात कंपनियाँ लाभप्रद नहीं हैं।
- चीन ने 2015-16 में 120 मिलियन टन से घटाकर 60 मिलियन टन निर्यात किया था।
- चीन ने नई इस्पात क्षमता के लाइसेंस जारी करना बंद कर दिया है।
- केवल भारतीय मांग से नई क्षमता निवेश को नहीं जायज ठहराया जा सकता।
- इस्पात कीमतें $450 से बढ़कर $500 से ऊपर हो गई हैं, पर $550-$600 की जरूरत है।
- टाटा स्टील वैश्विक कीमतों की चिंता के बीच अपने पूंजीगत खर्च की योजनाओं को जारी रखेगा।





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