1920 के असहयोग–खिलाफत आंदोलन के दौरान गांधी इस बात से परेशान थे कि दंगों में लोग “वंदे मातरम्” और “अल्लाहु अकबर” के नारे लगाकर एक-दूसरे पर दबदबा जताते थे। मुस्लिम समुदाय के विरोध की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि आज फिर सामने आई जब PM मोदी ने कहा कि 1937 में इसके “महत्वपूर्ण” पद हटाए गए, जिससे विभाजन के बीज बोए गए।
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* 1920: दंगों में नारे सुनकर गांधी असहज; कहा साम्प्रदायिक दबदबा दिखता है
* बैंकिमचंद्र की कविता पर मुस्लिम विरोध; इसे मूर्तिपूजक माना गया
* ‘आनंदमठ’ में हिंदू संन्यासियों बनाम मुस्लिम शासन की छवि
* टैगोर व कांग्रेस नेताओं ने सिर्फ दो पद राष्ट्रीय गीत के रूप में स्वीकारे
* 1875 का मूल संस्करण दो पदों का; 1882 में छह पद किए गए
* 2025: मोदी बोले—1937 में “जरूरी पद” हटाकर गीत को “टुकड़ों में बांटा”
* कहा—इससे देश के विभाजन के बीज भी पड़े
* BJP ने कांग्रेस पर संवेदनशीलता appease करने के आरोप लगाए
* इतिहासकार: विरोध पहले से मौजूद; धार्मिक संवेदनशीलता मुख्य कारण
* 1920–30 के दशक में पहचान राजनीति से विवाद और गहरा हुआ





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