1980 के दशक में असम ने अपनी सांस्कृतिक और भाषाई पहचान बचाने के लिए एक ऐतिहासिक संघर्ष किया, जिसका अंत 1985 के असम समझौते से हुआ। यह आंदोलन अवैध प्रवासियों के बढ़ते प्रभाव और असम की पहचान बचाने की लड़ाई का प्रतीक बना। BulletsIn खारगेश्वर तालुकदार असम आंदोलन के पहले शहीद बने, उनकी शहादत आंदोलन




