नई रिसर्च के अनुसार, जलवायु परिवर्तन और बढ़ती ऊर्जा मांग के चलते सौर ऊर्जा की कमी (सौर सूखा) बढ़ रही है। 1984 से 2014 के बीच हुए अध्ययन में उष्णकटिबंधीय और विकासशील क्षेत्रों में बार-बार बिजली संकट पाया गया। भविष्य में यह स्थिति और बिगड़ सकती है अगर उत्सर्जन पर रोक न लगी।
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- सौर सूखा = 3+ दिन मांग > आपूर्ति
- अमेरिका पश्चिम, दक्षिण-पूर्व एशिया, अफ्रीका, पूर्वी ब्राजील में हर साल कई बार
- 1984 के बाद से हर दशक में 0.76 और सूखे
- 30 वर्षों में 29% सूखे इसी वृद्धि के कारण
- कारण: गर्मी से मांग बढ़ी, बादल/प्रदूषण से उत्पादन घटा
- जब कूलिंग की जरूरत सबसे ज्यादा, तब बिजली की किल्लत
- 2090 तक 7 गुना अधिक, 1.3 गुना ज्यादा गंभीर सूखे की आशंका (मध्यम उत्सर्जन पथ)
- उत्सर्जन घटाने से 2060 के बाद सूखे घट सकते हैं
- अध्ययन Geophysical Research Letters में प्रकाशित
- शोधकर्ताओं ने स्वच्छ ऊर्जा को अपनाने की सिफारिश की





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