सोशल सर्विस लीग औपनिवेशिक भारत की एक सामाजिक सुधार संस्था थी, जो राजनीतिक आंदोलनों से दूर रहकर श्रमिकों के कल्याण और सामाजिक सुधार पर केंद्रित थी।
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सोशल सर्विस लीग की स्थापना 1911 में बंबई (वर्तमान मुंबई) में एन. एम. जोशी द्वारा की गई थी, जिसका उद्देश्य संगठित प्रयासों से श्रमिकों की सामाजिक समस्याओं का समाधान करना था।
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यह संस्था मुख्य रूप से औद्योगिक मजदूरों के जीवन स्तर में सुधार के लिए शिक्षा, स्वच्छता, आवास सुविधाओं और बुनियादी स्वास्थ्य सेवाओं पर कार्य करती थी।
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लीग ने सुधार के लिए गैर-राजनीतिक और संवैधानिक तरीकों को अपनाया तथा सरकार, नियोक्ताओं और स्थानीय निकायों के साथ सहयोग पर भरोसा किया।
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वयस्क शिक्षा लीग की प्रमुख गतिविधियों में शामिल थी, जिसके तहत रात के स्कूल, चल पुस्तकालय और पठन कक्ष श्रमिक वर्ग के लिए संचालित किए जाते थे।
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संस्था मजदूरों में स्वच्छता, जिम्मेदार नागरिकता, सामाजिक कर्तव्यों और सामुदायिक कल्याण के महत्व के प्रति जागरूकता फैलाने का कार्य करती थी।
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स्वतंत्रता से पूर्व के श्रमिक कल्याण आंदोलन में सोशल सर्विस लीग का महत्वपूर्ण योगदान रहा, जिसने सामाजिक सुधार को आर्थिक विकास से जोड़कर देखा।





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