सिंह सभा आंदोलन की शुरुआत पंजाब में 1873 में हुई, जब सिख विद्यार्थियों के ईसाई धर्म अपनाने पर समुदाय में चिंता बढ़ी। यह आंदोलन सिख धर्म को पुनर्जीवित करने, सामाजिक कुरीतियों को दूर करने और गुरुमुखी व आधुनिक शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए शुरू हुआ। यह राजनीति से दूर रहकर समाज और धर्म के सुधार पर केंद्रित था।
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- 1873 में अमृतसर में मिशन स्कूल के छात्रों के ईसाई बनने पर आंदोलन की शुरुआत
- उद्देश्य: सिख धर्म का पुनरुद्धार, ब्राह्मो, आर्य समाज, मुस्लिम प्रचार का विरोध
- गुरुमुखी भाषा और सिख इतिहास-ग्रंथों के प्रकाशन को बढ़ावा
- प्रमुख नेता: खे़म सिंह बेदी, ठाकुर सिंह, ज्ञानी ज्ञानी सिंह, कंवर बिक्रम सिंह
- राजनीतिक मुद्दों से दूरी, ब्रिटिश शासन से सहयोग की नीति अपनाई
- खालसा स्कूलों और कॉलेजों के ज़रिए आधुनिक शिक्षा का प्रसार; खालसा कॉलेज 1892 में खुला
- सिख पहचान को मजबूत किया, गैर-सिख प्रथाओं और धर्म परिवर्तन का विरोध
- संगठन निर्माण: जनरल सभा, खालसा दीवान (अमृतसर 1883, लाहौर 1886)
- एकता के लिए 1900 में खालसा दीवान सुप्रीम की स्थापना हुई
- सिख युवाओं को शिक्षा से जोड़ा; खालसा विद्यार्थी सभा (1891), सिख शिक्षा सम्मेलन (1908)





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