संगम काल लगभग 3री सदी ईसा पूर्व से 3री सदी ईस्वी तक दक्षिण भारत में फैला था। यह काल मदुरै में कवि-सम्मेलनों (संगमों) के लिए जाना जाता है और चेर, चोल और पांड्य शासकों के अधीन तमिल साहित्य व संस्कृति का स्वर्ण युग माना जाता है।
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- 3री सदी ई.पू.–3री सदी ई. तक दक्षिण भारत में संगम काल
- मदुरै में हुए कवि-सम्मेलनों से पड़ा नाम ‘संगम’
- 3 संगम बताए गए; तीसरे संगम की रचनाएँ ही बचीं
- चेर, चोल, पांड्य शासक; प्रतीक चिन्ह: धनुष, बाघ, मछली
- शासन प्रणाली थी वंशानुगत राजतंत्र, मंत्री-मंडल सहायता में
- रोम व पश्चिम से व्यापार; तमिलनाडु में मिले रोमन सिक्के
- कृषि मुख्य रोजगार; चावल व काली मिर्च प्रमुख फसलें
- पुहार, टोंडी, कोरकई जैसे बंदरगाह थे अंतरराष्ट्रीय व्यापार केंद्र
- प्रमुख ग्रंथ: तोलकाप्पियम, शिलप्पदिकारम्, तिरुक्कुरल
- ‘कडई एलु वल्लल्गल’ जैसे छोटे राजाओं ने तमिल साहित्य को संरक्षण दिया





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