24 फरवरी 2026 को प्रकाशित एक वैज्ञानिक अध्ययन में चेतावनी दी गई है कि जलवायु परिवर्तन के कारण अंटार्कटिका के प्रायद्वीप क्षेत्र में बारिश बढ़ रही है। शोध के अनुसार, इस सदी में मध्यम और उच्च उत्सर्जन परिदृश्यों में बर्फ की जगह अधिक वर्षा होगी। इससे ग्लेशियरों का पिघलना तेज होगा, बर्फीली चट्टानों की स्थिरता कमजोर होगी, पारिस्थितिकी तंत्र प्रभावित होगा और वैज्ञानिक ढांचे व ऐतिहासिक स्थलों को खतरा बढ़ेगा।
BulletsIn
- अंटार्कटिका प्रायद्वीप वैश्विक औसत से तेज गर्म हो रहा
- बर्फ की जगह वर्षा की मात्रा बढ़ने की संभावना
- बारिश और गर्मी से ग्लेशियर पिघलना व हिमखंड टूटना तेज
- तैरती आइस शेल्फ कमजोर, ढहने का खतरा
- समुद्री बर्फ में कमी; तटीय सुरक्षा घटेगी
- पेंगुइन के बच्चे भारी बारिश से जोखिम में
- क्रिल और शैवाल आधारित पारिस्थितिकी पर दबाव
- चरम मौसम घटनाएं और “एटमॉस्फेरिक रिवर” बढ़ रहे
- शोध स्टेशन, हवाई पट्टी, ऐतिहासिक झोपड़ियां खतरे में
- तापमान 1.5°C से नीचे सीमित करने पर असर धीमा हो सकता है





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