स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के अध्ययन में पाया गया है कि 1980–2015 के बीच बाढ़ के कारण वैश्विक धान उत्पादन में लगभग 4.3%—यानी हर साल करीब 18 मिलियन टन—की कमी आई। जलवायु परिवर्तन के साथ यह खतरा और बढ़ रहा है, और भारत जैसे धान-निर्भर देशों पर इसका सबसे ज्यादा असर होगा।
BulletsIn:
* स्टैनफोर्ड अध्ययन: बाढ़ से धान उत्पादन में 4.3% (≈18M टन/वर्ष) कमी
* विश्लेषण अवधि: 1980–2015
* अब केवल सूखा नहीं, अत्यधिक पानी भी बड़ा खतरा
* अरबों लोगों की खाद्य सुरक्षा पर असर
* भारत धान उत्पादन क्षेत्र बड़ा होने से उच्च जोखिम में
* हीट स्ट्रेस से 15–20% और कमी की चेतावनी
* विशेषज्ञ: एग्रोइकोलॉजी व जलवायु-लचीला कृषि जरूरी
* बाढ़-सहनशील धान किस्में व फसल विविधीकरण की जरूरत
* मौसमी नहीं, अब सालभर जलवायु खतरा बनती बाढ़
* निष्कर्ष: गर्म होती दुनिया में लचीलापन अनिवार्य





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