19वीं और 20वीं सदी के आरंभ में उत्तर भारत में आर्य समाज और देव समाज जैसे सुधार आंदोलनों की शुरुआत हुई। स्वामी दयानंद सरस्वती ने 1875 में आर्य समाज की स्थापना की, जो वैदिक सिद्धांतों पर आधारित हिंदू धर्म सुधार की दिशा में कार्यरत रहा। वहीं शिव नारायण अग्निहोत्री ने 1887 में देव समाज की स्थापना की, जिसने नैतिक जीवन और सामाजिक सुधार को बढ़ावा दिया।
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- स्वामी दयानंद ने 1875 में वैदिक सिद्धांतों पर आधारित आर्य समाज की स्थापना की
- जातिवाद, मूर्तिपूजा, पुरोहितवाद, पशु बलि और अंधविश्वास का विरोध किया
- बालिग विवाह, महिला शिक्षा और अंतरजातीय विवाह का समर्थन किया
- वेदों को अचूक माना, पुराणों और ब्राह्मण-प्रधान रीति-रिवाजों को खारिज किया
- पश्चिमी और पारंपरिक शिक्षा मिलाने के लिए स्कूल, गुरुकुल स्थापित किए
- शुद्धि आंदोलन चलाया—जो हिंदुओं की घर वापसी और छुआछूत विरोधी था
- शुद्धि से साम्प्रदायिक तनाव बढ़ा; 1926 में स्वामी श्रद्धानंद की हत्या हुई
- देव समाज की स्थापना 1887 में लाहौर में शिव नारायण अग्निहोत्री ने की
- देव समाज ने नैतिक जीवन, महिला शिक्षा, और जातीय एकता पर बल दिया
- इन आंदोलनों ने सामाजिक प्रगति, महिलाओं के अधिकार और सुधार को बढ़ावा दिया





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