भारतीय रियासतें ब्रिटिश अधिपत्य के अंतर्गत शासित राजतंत्रीय राज्य थे, जिनका स्वतंत्र भारत में एकीकरण राष्ट्रीय नेतृत्व द्वारा संपन्न हुआ।
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- रियासतें भारतीय उपमहाद्वीप के लगभग दो-पंचमांश भूभाग और एक-तिहाई जनसंख्या पर शासन करती थीं तथा ब्रिटिश सम्राट की सर्वोच्चता स्वीकार करती थीं।
- ब्रिटिश शासन ने रिंग फेंस, सहायक संधि, अधीनस्थ पृथक्करण और दत्तक निषेध सिद्धांत जैसी नीतियों से रियासतों की संरचना परिवर्तित की।
- सहायक संधि के अंतर्गत शासकों को ब्रिटिश सैनिक रखना, बाह्य संधि न करना तथा ब्रिटिश प्रतिनिधि स्वीकार करना अनिवार्य था।
- दत्तक निषेध सिद्धांत के माध्यम से प्राकृतिक उत्तराधिकारी न होने पर सतारा, नागपुर और झांसी जैसी रियासतों का विलय किया गया।
- भारत शासन अधिनियम 1935 ने अखिल भारतीय संघ की परिकल्पना की, जिसमें रियासतों को नामित प्रतिनिधित्व प्रदान किया गया।
- प्रजा मंडलों और अखिल भारतीय राज्य प्रजा सम्मेलन ने उत्तरदायी शासन तथा नागरिक स्वतंत्रताओं की मांग को सशक्त किया।
- भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान रियासतों की जनता राष्ट्रीय स्वतंत्रता संग्राम से जुड़कर व्यापक राजनीतिक चेतना का परिचय दिया।
- स्वतंत्रता के पश्चात सरदार वल्लभभाई पटेल के नेतृत्व में कूटनीतिक तथा सैन्य प्रयासों द्वारा अधिकांश रियासतों का भारतीय संघ में एकीकरण हुआ।





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