सेवानिवृत्त सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश अभय एस ओका ने कहा कि जब तक हर नागरिक अपनी जिम्मेदारी नहीं समझेगा, प्रदूषण पर काबू नहीं पाया जा सकता। दिल्ली में गंभीर वायु प्रदूषण के बीच उन्होंने कहा कि पर्यावरण की रक्षा केवल कार्यकर्ताओं या अदालतों पर नहीं छोड़ी जा सकती। यह संविधान से जुड़ा नागरिक कर्तव्य है।
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- नागरिक सहभागिता बिना प्रदूषण नियंत्रण असंभव
- जिम्मेदारी केवल पर्यावरण कार्यकर्ताओं तक सीमित
- पर्यावरण संरक्षण संवैधानिक कर्तव्य है
- संविधान के 75 साल बाद भी कर्तव्य की अनदेखी
- सोच बदलने से ही स्थायी समाधान संभव
- दिल्ली की हवा ‘गंभीर’ श्रेणी में पहुंची
- कई इलाकों में AQI 400 के पार
- आधे से ज्यादा निगरानी केंद्रों पर गंभीर स्थिति
- पर्यावरण पर सख्ती करने वाले जजों पर भी हमले
- कार्यकर्ताओं को आलोचना नहीं, समर्थन मिलना चाहिए





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