पोखरण परमाणु परीक्षणों ने भारत को वैश्विक रणनीतिक शक्ति के रूप में स्थापित किया और देश की रक्षा, विज्ञान तथा परमाणु क्षमता को नई मजबूती प्रदान की।
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- भारत ने 18 मई 1974 को राजस्थान के पोखरण में ऑपरेशन स्माइलिंग बुद्धा के तहत अपना पहला सफल परमाणु परीक्षण अत्यंत गोपनीय तरीके से किया था।
- वर्ष 1974 का यह भूमिगत परमाणु परीक्षण प्लूटोनियम आधारित तकनीक पर आधारित था, जिसने भारत को वैश्विक परमाणु सक्षम देशों की श्रेणी में पहुंचाया।
- राजस्थान के थार मरुस्थल में स्थित पोखरण आगे चलकर भारत के उन्नत परमाणु हथियार और सामरिक परीक्षण कार्यक्रम का प्रमुख केंद्र बना।
- भारत ने मई 1998 में ऑपरेशन शक्ति के तहत पोखरण-II परमाणु परीक्षण किए, जिनमें पांच सफल परमाणु विस्फोट शामिल थे।
- एपीजे अब्दुल कलाम, आर. चिदंबरम और अनिल काकोडकर जैसे वैज्ञानिकों ने भारत की स्वदेशी परमाणु और मिसाइल क्षमताओं को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
- पोखरण-II परीक्षणों के बाद भारत ने स्वयं को आधिकारिक रूप से परमाणु हथियार संपन्न राष्ट्र घोषित किया और अपनी सामरिक सुरक्षा क्षमता को मजबूत किया।
- भारत प्रत्येक वर्ष 11 मई को राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस मनाता है, जो पोखरण-II से जुड़ी वैज्ञानिक और तकनीकी उपलब्धियों को समर्पित है।
- भारत का परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम तेजी से विस्तार कर रहा है और वर्ष 2047 तक 100 GW परमाणु ऊर्जा क्षमता हासिल करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।





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