जापान की तोहो यूनिवर्सिटी और NASA द्वारा संचालित एक अध्ययन में पाया गया है कि धरती पर जीवन का अंत उल्कापिंड या जलवायु परिवर्तन से नहीं, बल्कि धीरे-धीरे ऑक्सीजन की कमी से होगा। यह प्रक्रिया अरबों वर्षों में होगी, जब सूर्य की चमक में वृद्धि के कारण वातावरण में गैसों का संतुलन बिगड़ जाएगा।
BulletsIn
- जीवन का अंत ऑक्सीजन की कमी से, न कि बाहरी आपदा से होगा
- अध्ययन जापान की तोहो यूनिवर्सिटी और NASA ने किया
- अरबों वर्षों की वायुमंडलीय सिमुलेशन से निष्कर्ष निकाला गया
- सूर्य की चमक धीरे-धीरे बढ़ेगी, जिससे गैस संतुलन बिगड़ेगा
- इसका असर ऑक्सीजन की भारी कमी के रूप में होगा
- ऑक्सीजन की कमी धीरे-धीरे होगी, अचानक नहीं
- परिणामस्वरूप मानव और पशु जीवन समाप्त होगा
- यह प्रक्रिया अरबों वर्षों बाद होगी, फिलहाल खतरा नहीं
- वर्तमान जीवन के लिए कोई तात्कालिक चिंता नहीं
- अध्ययन पृथ्वी के दीर्घकालिक जीवन चक्र की झलक देता है





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