भारतीय नौसेना ने आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने और विदेशी हथियारों पर निर्भरता कम करने के लिए स्वदेशी 80 मिमी एयरो रॉकेट विकसित करने की प्रक्रिया शुरू की है।
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- भारतीय नौसेना ने मिग-29के और मिग-29केयूबी लड़ाकू विमानों के लिए स्वदेशी 80 मिमी एयरो रॉकेट विकसित करने हेतु घरेलू कंपनियों को आमंत्रित किया है।
- यह पहल रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाने और विदेशी हथियार प्रणालियों पर निर्भरता कम करने की रणनीति का हिस्सा है।
- वर्तमान में इस प्रकार के रॉकेट पूरी तरह विदेशी मूल उपकरण निर्माताओं से प्राप्त किए जाते रहे हैं।
- 80 मिमी एयरो रॉकेट एक बहुउद्देशीय हथियार है जो बख्तरबंद और गैर-बख्तरबंद दोनों प्रकार के लक्ष्यों को निशाना बना सकता है।
- मिग-29के और मिग-29केयूबी विमान आईएनएस विक्रमादित्य और आईएनएस विक्रांत पर तैनात प्रमुख नौसैनिक लड़ाकू विमान हैं।
- नौसेना ने स्पष्ट किया है कि रॉकेट के सभी उपघटक और प्रणालियां पूर्णतः स्वदेशी रूप से विकसित की जानी चाहिए।
- सफल परीक्षणों के बाद नौसेना 273 वास्तविक रॉकेट तथा लगभग 2400 प्रशिक्षण रॉकेट खरीदने की योजना बना रही है।
- यह हथियार प्रणाली माइनस 60 डिग्री सेल्सियस से लेकर प्लस 60 डिग्री सेल्सियस तक के तापमान में कार्य करने में सक्षम होगी।





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