मेरठ की उन्नीस वर्षीय पैरा खिलाड़ी रिया सोलंकी ने भुवनेश्वर में आयोजित राष्ट्रीय पैरा एथलेटिक्स प्रतियोगिता में गोला फेंक स्पर्धा का स्वर्ण पदक जीता। यह उपलब्धि शारीरिक चुनौती, आर्थिक कठिनाई, पारिवारिक त्याग और निरंतर परिश्रम के बीच उनकी दृढ़ता को दर्शाती है।
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- रिया सोलंकी मेरठ की उन्नीस वर्षीय पैरा खिलाड़ी हैं, जिन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर स्वर्ण पदक जीता है।
- उन्होंने भुवनेश्वर में आयोजित राष्ट्रीय पैरा एथलेटिक्स प्रतियोगिता की गोला फेंक स्पर्धा में पहला स्थान हासिल किया।
- रिया का जन्म बाएँ हाथ के कोहनी के नीचे वाले हिस्से के बिना हुआ था।
- उन्होंने वर्ष दो हजार अठारह में गोला फेंक का प्रशिक्षण शुरू किया और लगातार अभ्यास जारी रखा।
- सीमित साधनों और आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद उन्होंने खेल के प्रति अपना समर्पण नहीं छोड़ा।
- उनके परिवार को प्रशिक्षण के लिए आवश्यक पोषण उपलब्ध कराने में भी कई बार कठिनाई का सामना करना पड़ा।
- रिया की माता घरेलू काम करती थीं, जबकि उनके पिता ने परिवार के लिए अपने खेल सपने छोड़ दिए।
- कई बार माता-पिता ने अपना भोजन घटाकर रिया के लिए पौष्टिक आहार सुनिश्चित किया।
- यह स्वर्ण पदक रिया के खेल जीवन का बड़ा पड़ाव है और वर्षों की मेहनत का परिणाम है।
- रिया की सफलता संघर्ष, साहस, समर्पण और परिवार के सहयोग की प्रेरक मिसाल बनकर उभरी है।





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