केंद्र सरकार वरिष्ठ प्रशासनिक पदों पर लेटरल एंट्री प्रस्ताव की समीक्षा कर रही है, जिसे पीएमओ ने तैयार करने का निर्देश दिया है। उद्देश्य है—निजी क्षेत्र और अकादमिक विशेषज्ञों को प्रशासन में लाकर कौशल, दक्षता और विशेषज्ञता बढ़ाना। यह कदम आरक्षण, पारदर्शिता और प्रशासनिक संतुलन को लेकर गंभीर विवाद पैदा कर रहा है।
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- लेटरल एंट्री में निजी/अकादमिक विशेषज्ञों को वरिष्ठ सरकारी पदों पर लाया जाता है।
- पीएमओ ने डोप्ट को उप सचिव से संयुक्त सचिव स्तर तक भर्ती प्रस्ताव बनाने को कहा।
- कारण: धीमी नौकरशाही, भारी अधिकारी कमी, मंत्रालयों में अकार्यकुशलता।
- बसवन समिति ने 1,400 IAS और 900 IPS अधिकारियों की राष्ट्रीय कमी बताई।
- समर्थक कहते—नवाचार बढ़ेगा, जड़ता टूटेगी, विशेषज्ञता उपलब्ध होगी।
- आलोचक कहते—मैदान अनुभव कम, हितों का टकराव, आरक्षण को खतरा।
- अंतरराष्ट्रीय मॉडल दोनों प्रकार की सेवाएँ अपनाते, सीमित लेटरल भर्ती रखते हैं।
- समितियाँ पारदर्शी चयन और सिविल सर्विसेज अथॉरिटी बनाने की सिफारिश करती हैं।
- अगस्त 2024 में UPSC की लेटरल एंट्री अधिसूचना विरोध के बाद वापस ली गई।
- विशेषज्ञ सलाह देते—लेटरल एंट्री केवल मिशन-मोड, विशेष परियोजनाओं में उपयोग हो।





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