NITI Aayog के फ्रंटियर टेक हब (NITI-FTH) ने क्वांटम कंप्यूटिंग और इसके राष्ट्रीय सुरक्षा पर प्रभाव को लेकर एक रिपोर्ट जारी की है। यहां जानें कि UPSC उम्मीदवारों को क्वांटम कंप्यूटिंग के बारे में क्या जानना चाहिए।
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- NITI Aayog के फ्रंटियर टेक हब ने क्वांटम कंप्यूटिंग के विकास और इसके राष्ट्रीय सुरक्षा पर प्रभाव पर एक रणनीतिक रिपोर्ट जारी की।
- क्वांटम कंप्यूटिंग क्वांटम मेकॅनिक्स के सिद्धांतों जैसे सुपरपोजिशन, एंटैंगलमेंट और इंटरफेरेंस पर आधारित होती है।
- सुपरपोजिशन क्वांटम बिट्स (क्यूबिट्स) को एक समय में कई स्थितियों में होने की अनुमति देती है, जब तक उन्हें देखा न जाए।
- एंटैंगलमेंट में जुड़े कणों का एक दूसरे के व्यवहार पर तत्काल प्रभाव पड़ता है, जो सुरक्षित संचार के लिए उपयोगी हो सकता है।
- इंटरफेरेंस कणों की स्थितियों में बदलाव करके क्वांटम एल्गोरिदम की सटीकता को बेहतर बनाता है।
- माइक्रोसॉफ्ट का Majorana 1 चिप क्वांटम कंप्यूटिंग में नए कदम बढ़ाता है, जिससे क्यूबिट्स अधिक मजबूत, स्केलेबल और त्रुटि मुक्त बनते हैं।
- क्वांटम कंप्यूटिंग क्रिप्टोग्राफी और साइबर सुरक्षा को मजबूत कर सकता है, जिससे डेटा सुरक्षा में सुधार हो सकता है और पोस्ट-क्वांटम क्रिप्टोग्राफी (PQC) की आवश्यकता होगी।
- क्वांटम तकनीक इंटेलिजेंस गेदरिंग को बढ़ावा देगी, जिससे देश बड़े पैमाने पर संचार को इंटरसेप्ट और विश्लेषण कर सकेंगे।
- सैन्य उपयोग में रक्षा रणनीतियों को अनुकूलित करना और क्वांटम-समर्थित एआई ड्रोन और हथियारों का उन्नत उपयोग शामिल है।
- क्वांटम कंप्यूटिंग आर्थिक युद्ध को नया रूप दे सकता है, जिससे वित्तीय बाजारों को अस्थिर करना और बौद्धिक संपत्ति चोरी करना संभव हो सकता है।
- भौगोलिक शक्ति: क्वांटम तकनीक में एक देश की श्रेष्ठता उसे वैश्विक तकनीकी मानकों और विनियमों को आकार देने का अवसर देती है।





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