1968 में महिला मताधिकार की 50वीं वर्षगांठ ने ब्रिटेन में महिलाओं की असमान स्थिति पर राष्ट्रीय बहस शुरू की। इसी दौर में लेबर सांसद जॉयस बटलर ने कार्यस्थल भेदभाव के खिलाफ लगातार संघर्ष किया, जिसके परिणामस्वरूप 1975 में सेक्स डिस्क्रिमिनेशन एक्ट अस्तित्व में आया।
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- 1968 में महिलाओं की समानता पर धीमी प्रगति से निराशा; जॉयस बटलर को लगा अधिकारों की लड़ाई अधूरी है।
- प्रेरक घटना: महिला बस कंडक्टर को निरीक्षक बनने से रोका गया क्योंकि महिलाओं को बस चलाने की अनुमति नहीं थी।
- बटलर ने निष्कर्ष निकाला कि नस्ल भेदभाव कानून की तरह महिलाओं के लिए भी कानूनी सुरक्षा जरूरी।
- सरकार विरोधी थी, इसलिए उन्होंने हर साल Ten-Minute Rule Bill पेश किया; महिला सांसदों का मजबूत समर्थन मिला।
- देशभर की महिलाओं ने unequal pay, प्रमोशन रोकना, “जल्दी शादी करोगी” जैसे तर्क, और पुराने marriage bars की शिकायतें भेजीं।
- 1971–72 में महिलाओं की मुक्ति आंदोलन, Women in Media और राष्ट्रीय संगठनों ने अभियान को बल दिया।
- 1974 में सभी प्रमुख दलों ने अपने घोषणापत्रों में महिला-भेदभाव खत्म करने का वादा किया; उना क्रोल ने स्वतंत्र नारीवादी उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा।
- 1975 में लेबर सरकार ने कानून पेश किया; Equal Pay Act पूरी तरह लागू हुआ; मातृत्व अवकाश व गर्भावस्था में नौकरी से नहीं निकालने जैसी सुरक्षा मिली।
- कानून ने रोजगार, शिक्षा, वस्तुओं/सेवाओं में लिंग/वैवाहिक स्थिति आधारित भेदभाव को अवैध घोषित किया; Equal Opportunities Commission बनाई गई।
- सीमाएँ भी रहीं: पेंशन-कर छूटे; सेना व Church को छूट; गर्भावस्था व यौन उत्पीड़न के मुद्दे शुरू में पर्याप्त रूप से शामिल नहीं हुए।





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