जाट, जो पहले उत्तरी भारत में पशुपालक और किसान थे, मुग़ल साम्राज्य के खिलाफ विद्रोहों के ज़रिये ताकतवर बने। 17वीं–18वीं सदी में विशेष रूप से महाराजा सूरज मल के समय में उनका प्रभाव तेजी से बढ़ा।
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- 1669 में मथुरा से औरंगज़ेब के खिलाफ पहला जाट विद्रोह
- गोकला, राजाराम, चूरामन थे प्रारंभिक जाट नेताओं में
- सूरज मल ने भरतपुर राज्य को एक शक्तिशाली जाट साम्राज्य बनाया
- जाटों का नियंत्रण आगरा, दिल्ली, मथुरा जैसे प्रमुख क्षेत्रों तक फैला
- सूरज मल को “जाटों का प्लेटो” कहा गया उनकी रणनीति व बुद्धिमानी के लिए
- सूरज मल द्वारा बनवाया लोहागढ़ किला आज तक अजेय रहा
- 18वीं सदी में सिख खालसा पंथ की सैन्य ताकत में जाटों का बड़ा योगदान
- समय के साथ कई जाट खेती छोड़ शहरी नौकरियों और राजनीति में आए
- हिन्दू, सिख, मुस्लिम जाट मौजूद; जातिगत ढांचा ऐतिहासिक रूप से लचीला
- जाटों की उत्पत्ति इंडो-स्किथियन (मध्य एशिया) से मानी जाती है





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