भारत आईएनएस अरिधमन के सम्मिलन के साथ अपनी समुद्र-आधारित परमाणु प्रतिरोध क्षमता को सुदृढ़ करते हुए विश्वसनीय द्वितीय प्रहार सामर्थ्य को और सशक्त करेगा।
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- आईएनएस अरिधमन स्वदेशी रूप से निर्मित अरिहंत श्रेणी की तीसरी परमाणु-संचालित बैलिस्टिक प्रक्षेपास्त्र पनडुब्बी है, जिसे शीघ्र ही भारतीय नौसेना में सम्मिलित किया जाएगा।
- यह पनडुब्बी विशाखापत्तनम स्थित उन्नत प्रौद्योगिकी पोत परियोजना के अंतर्गत निर्मित हुई है तथा इसका विस्थापन लगभग सात हजार टन है।
- इसमें चौबीस के-पंद्रह सागरिका प्रक्षेपास्त्र तथा आठ दीर्घ दूरी के के-चार प्रक्षेपास्त्र स्थापित किए जा सकते हैं।
- तिरासी मेगावाट दाबित जल रिएक्टर से संचालित यह पनडुब्बी ध्वनिरोधी प्रौद्योगिकी से युक्त है, जिससे इसकी पहचान क्षमता न्यूनतम रहती है।
- यह भारत की सुनिश्चित द्वितीय प्रहार क्षमता को सुदृढ़ करती है, जिससे किसी भी परमाणु आक्रमण के पश्चात प्रत्युत्तर संभव है।
- सामरिक बल कमान के अंतर्गत बहु-पनडुब्बी संचालन से भारत निरंतर समुद्र-आधारित प्रतिरोध व्यवस्था की दिशा में अग्रसर है।
- इसके परियोजना वर्षा नौसैनिक अड्डे पर तैनात किए जाने की संभावना है, जहाँ सामरिक संपत्तियों की उच्च सुरक्षा सुनिश्चित की गई है।





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