पुणे स्थित सेंटर फॉर रेजिलिएंस स्टडीज के एक अध्ययन में पाया गया है कि महाराष्ट्र के पश्चिमी घाट में रहने वाली महादेव कोली जनजाति के पास जलवायु परिवर्तन से लड़ने के लिए जरूरी पारंपरिक पारिस्थितिकीय ज्ञान है। यह समुदाय 51 औषधीय वृक्ष प्रजातियों का उपयोग करता है।
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- महादेव कोली जनजाति रहती है जैव विविधता से भरपूर पश्चिमी घाट क्षेत्र में
- अध्ययन में बताया गया, जनजाति का पारंपरिक ज्ञान वैज्ञानिक रूप से महत्वपूर्ण
- बुखार, दस्त, खांसी, सांप काटने तक के इलाज में 51 वृक्ष प्रजातियों का उपयोग
- वृक्षों की छाल सबसे ज्यादा इस्तेमाल (24.8%), फिर पत्तियां (23.1%), फल (20.5%)
- फैबेसी और मोरेसी परिवार की प्रजातियां सबसे प्रभावी औषधीय वृक्ष
- जनजाति मौसम बदलाव, भूमि उपयोग और पौधों की पहचान में पारंगत
- समुदाय के ज्ञान से मिल सकता है स्थानिक जलवायु डेटा
- अध्ययन में सुझाव: पारंपरिक ज्ञान को ‘लोककथा’ नहीं, वैज्ञानिक डाटा माना जाए
- मुख्यधारा के वैज्ञानिकों को आदिवासी ज्ञान से साझेदारी की अपील
- ऋतु चक्र, वनस्पति परंपराओं को जलवायु नीति में शामिल करने की जरूरत





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