डेलॉइट की रिपोर्ट के अनुसार, भारत को 2030 तक जलवायु परिवर्तन और ऊर्जा संक्रमण लक्ष्यों को पूरा करने के लिए लगभग 1.5 ट्रिलियन डॉलर के निवेश की आवश्यकता होगी। यह निवेश हरित ऊर्जा, बायोफ्यूल्स, ग्रीन हाइड्रोजन और ऊर्जा भंडारण के क्षेत्र में किया जाना जरूरी है।
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- भारत को 2030 तक 1.5 ट्रिलियन डॉलर निवेश की जरूरत।
- 500 GW गैर-जीवाश्म क्षमता के लिए चाहिए $200–250 अरब।
- मौजूदा गैर-जीवाश्म क्षमता 242.8 GW, कुल का लगभग 50%।
- ऊर्जा भंडारण के लिए 8 गुना विस्तार जरूरी, लागत $250–300 अरब।
- एथेनॉल मिश्रण और बायोफ्यूल्स के लिए $75–80 अरब की आवश्यकता।
- ग्रीन हाइड्रोजन पर $90–100 अरब निवेश अनुमानित।
- ग्रीन बॉन्ड, जलवायु फंड और ब्लेंडेड फाइनेंस से निवेश जुटाना जरूरी।
- इससे उत्सर्जन घटेगा, रोजगार बढ़ेगा, और संवेदनशील समुदायों की रक्षा होगी।
- जलवायु वित्त से दीर्घकालिक लचीलापन बनेगा जलवायु-प्रभावित क्षेत्रों में।
- समावेशी विकास और डिजिटल इन्फ्रा से भारत बन सकता है सस्टेनेबिलिटी लीडर।





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