भारत व्यक्तिगत चिप निर्माण केंद्रों से आगे बढ़कर डिजाइन, निर्माण, पैकेजिंग, उपकरण, सामग्री, अनुसंधान और प्रतिभा वाला व्यापक अर्धचालक तंत्र विकसित कर रहा है।
BulletsIn
- जुलाई 2026 में स्वीकृत सेमिकॉन 2.0 के लिए 1,27,500 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं, जिससे अर्धचालक तंत्र और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला मजबूत होगी।
- नरेंद्र मोदी ने नई दिल्ली में सेमिकॉन इंडिया 2026 का उद्घाटन किया, जिसमें उद्योग, निवेश, नीति, शिक्षा और नवाचार क्षेत्र के प्रतिनिधि शामिल हुए।
- भारत में अर्धचालक की मांग 2030 तक 110 अरब डॉलर और 2035 तक 200 अरब डॉलर से अधिक पहुंचने का अनुमान है।
- 2017 से 2025 के बीच भारत ने लगभग 150 अरब डॉलर के अर्धचालक उत्पाद आयात किए, जिससे बाहरी आपूर्ति पर निर्भरता सामने आती है।
- दिसंबर 2021 में स्वीकृत सेमिकॉन 1.0 के लिए 76,000 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए थे, जिससे निर्माण और पैकेजिंग क्षमताओं की नींव बनी।
- भारत में 12 अर्धचालक निर्माण इकाइयों को मंजूरी मिली है, जिनमें 1.64 लाख करोड़ रुपये से अधिक का संचयी निवेश प्रस्तावित है।
- देश में 24 चिप डिजाइन परियोजनाएं स्वीकृत हैं और 500 संस्थाओं के एक लाख से अधिक अभियंताओं को उन्नत डिजाइन उपकरणों की सुविधा मिली है।
- भारत में विश्व के अर्धचालक क्षेत्र से जुड़े क्षमता केंद्रों का लगभग 7 प्रतिशत हिस्सा है और वैश्विक चिप डिजाइन कार्यबल का लगभग 20 प्रतिशत यहां कार्यरत है।
- सेमिकॉन 2.0 चिप डिजाइन और निर्माण के साथ उन्नत पैकेजिंग, उपकरण, सामग्री, अनुसंधान तथा प्रतिभा विकास पर भी ध्यान केंद्रित करता है।
- कृत्रिम बुद्धिमत्ता, 5जी, विद्युत गतिशीलता, स्वचालित वाहन और आंकड़ा केंद्रों की बढ़ती मांग भारत के अर्धचालक अवसरों को गति दे सकती है।





What do you think?
It is nice to know your opinion. Leave a comment.