भारत एशिया-प्रशांत क्षेत्र में डेटा सेंटर के लिए सबसे आकर्षक और कम बाधित बाजार के रूप में उभर रहा है, जिसे कम बिजली लागत, मजबूत हाइपरस्केलर मांग और एआई आधारित डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार का समर्थन मिल रहा है।
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- भारत एशिया-प्रशांत क्षेत्र का सबसे कम बाधित डेटा सेंटर बाजार बनकर उभरा है, जिसका कारण कम बिजली लागत और न्यूनतम अवसंरचनात्मक बाधाएँ हैं।
- CBRE रिपोर्ट के अनुसार, भारत की कुल डेटा सेंटर क्षमता 2028 के अंत तक 3 गीगावाट से अधिक हो सकती है।
- भारत एकमात्र प्रमुख एपीएसी देश है जिसे सभी विकास बाधा मापदंडों में “लो” रेटिंग मिली है, जिसमें बिजली, निर्माण लागत, श्रम और पर्यावरण जोखिम शामिल हैं।
- यह वृद्धि हाइपरस्केलर कंपनियों, एआई वर्कलोड, नियो-क्लाउड ऑपरेटर, जीसीसी और एंटरप्राइज उपयोगकर्ताओं की बढ़ती मांग से प्रेरित है।
- भारत की मौजूदा लाइव डेटा सेंटर क्षमता 2025 के अंत तक लगभग 1,700 मेगावाट है।
- 2026 में लगभग 500 मेगावाट अतिरिक्त क्षमता जोड़े जाने की उम्मीद है।
- अन्य एशिया-प्रशांत देशों में बिजली और लागत संबंधी बाधाओं के कारण भारत निवेश के लिए पसंदीदा स्थान बन रहा है।
- यह रुझान भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था और एआई-आधारित विकास में मजबूत स्थिति को दर्शाता है।





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