भारत सरकार ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत बनाने के लिए ₹14,527 करोड़ की अनुमानित लागत से सार्वजनिक निजी भागीदारी मॉडल के अंतर्गत रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार कार्यक्रम का दूसरा चरण शुरू करने की तैयारी कर रही है।
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- भारत सरकार रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार कार्यक्रम के दूसरे चरण को सार्वजनिक निजी भागीदारी मॉडल के अंतर्गत लगभग ₹14,527 करोड़ की अनुमानित लागत से विकसित करने की योजना बना रही है।
- दूसरे चरण के अंतर्गत दो नए वाणिज्यिक सह रणनीतिक कच्चा तेल भंडारण केंद्र स्थापित किए जाएंगे, जिससे देश की ऊर्जा सुरक्षा और आपातकालीन भंडारण क्षमता बढ़ेगी।
- पेट्रोलियम राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने लोकसभा में बताया कि सरकार ने व्यवहार्यता अंतर सहायता को कुल परियोजना लागत के 60 प्रतिशत तक सीमित रखा है।
- व्यवहार्यता अंतर सहायता वह सरकारी वित्तीय सहायता है, जिसके माध्यम से सार्वजनिक हित की महत्वपूर्ण अवसंरचना परियोजनाओं को आर्थिक रूप से व्यवहार्य बनाया जाता है।
- प्रथम चरण में भारत ने विशाखापत्तनम, मंगलूरु और पडूर में कुल 5.33 मिलियन मीट्रिक टन रणनीतिक कच्चा तेल भंडारण क्षमता विकसित की थी।
- रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार वैश्विक आपूर्ति बाधाओं, भू राजनीतिक संकटों तथा अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में अचानक वृद्धि जैसी परिस्थितियों में ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
- सार्वजनिक निजी भागीदारी मॉडल से निजी निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा, संचालन क्षमता में सुधार होगा तथा सरकार पर वित्तीय भार कम होगा।
- रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार का विस्तार भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता, आपातकालीन ईंधन उपलब्धता और दीर्घकालिक आर्थिक सुरक्षा को और मजबूत करेगा।





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