भारत और रूस ने 2030 तक 50 अरब अमेरिकी डॉलर (लगभग ₹4.42 लाख करोड़) के पारस्परिक निवेश का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है। इसका उद्देश्य उन्नत विनिर्माण, स्वच्छ ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिजों और नई प्रौद्योगिकियों में सहयोग को बढ़ाना है।
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- भारत और रूस ने 2030 तक 50 अरब अमेरिकी डॉलर के पारस्परिक निवेश का लक्ष्य तय किया है।
- यह लक्ष्य मॉस्को में आयोजित भारत–रूस संयुक्त कार्य समूह (Joint Working Group on Priority Investment Projects) की बैठक में तय किया गया।
- बैठक की सह-अध्यक्षता DPIIT और रूस के आर्थिक विकास मंत्रालय ने की।
- दोनों देशों ने उन्नत विनिर्माण (Advanced Manufacturing) में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई।
- प्राथमिक क्षेत्रों में महत्वपूर्ण खनिज, खनन और धातुकर्म शामिल हैं।
- साझेदारी ग्रीन हाइड्रोजन और ऊर्जा भंडारण (Energy Storage) तकनीकों पर भी केंद्रित रहेगी।
- उभरती प्रौद्योगिकियों और नवाचार में सहयोग को बढ़ावा दिया जाएगा।
- दोनों देशों ने निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने पर विशेष जोर दिया।
- संयुक्त औद्योगिक और निवेश परियोजनाओं को प्रोत्साहित किया जाएगा।
- भारत ने अपने आर्थिक सुधारों, कुशल कार्यबल और निवेश-अनुकूल वातावरण को प्रमुख विशेषताओं के रूप में प्रस्तुत किया।
- रूस–भारत निवेश मंच (Russia–India Investment Forum) में द्विपक्षीय निवेश और औद्योगिक सहयोग पर चर्चा हुई।
- इस बैठक में CII और FICCI सहित प्रमुख उद्योग संगठनों ने भाग लिया।
- “Making in Russia for India” मॉडल को औद्योगिक सहयोग के नए ढांचे के रूप में प्रस्तुत किया गया।
- यह मॉडल उर्वरक, खनन और महत्वपूर्ण खनिज क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ावा देगा।
- यह निवेश लक्ष्य दोनों देशों के बीच प्रौद्योगिकी सहयोग, मजबूत आपूर्ति श्रृंखला और दीर्घकालिक आर्थिक साझेदारी को नई मजबूती देगा।





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