भारत ने आईएन-स्पेस के माध्यम से निजी कंपनियों को पीएसएलवी तकनीक हस्तांतरण की पेशकश कर वैश्विक अंतरिक्ष बाजार में अपनी औद्योगिक क्षमता मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है।
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- इंडियन नेशनल स्पेस प्रमोशन एंड ऑथराइजेशन सेंटर ने भारतीय निजी कंपनियों को पोलर सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल तकनीक के पूर्ण हस्तांतरण के लिए आमंत्रित किया है।
- भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन पीएसएलवी तकनीक हस्तांतरण प्रक्रिया के दौरान लगभग 30 महीनों तक तकनीकी मार्गदर्शन और अवसंरचना सहायता प्रदान करेगा।
- पोलर सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल भारत का विश्वसनीय मध्यम क्षमता वाला प्रक्षेपण यान है जिसका उपयोग उपग्रहों को ध्रुवीय कक्षा में भेजने के लिए किया जाता है।
- इससे पहले न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड ने ₹860 करोड़ का पीएसएलवी निर्माण अनुबंध हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड और लार्सन एंड टुब्रो को दिया था।
- इस कार्यक्रम में भाग लेने वाली भारतीय निजी कंपनियों के पास कम से कम 7 वर्षों का संचालन अनुभव और अंतरिक्ष या एयरोस्पेस क्षेत्र की विशेषज्ञता होना आवश्यक है।
- पीएसएलवी तकनीक हस्तांतरण भारत का दूसरा पूर्ण लॉन्च व्हीकल ट्रांसफर बन सकता है, इससे पहले एसएसएलवी तकनीक हस्तांतरण 2025 में पूरा हुआ था।
- यह पहल भारत के निजी अंतरिक्ष उद्योग, उपग्रह प्रक्षेपण निर्यात और वैश्विक वाणिज्यिक लॉन्च बाजार में प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को मजबूत करेगी।
- अंतरिक्ष क्षेत्र में बढ़ती सार्वजनिक-निजी भागीदारी भारत को वैश्विक अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी और उन्नत विनिर्माण केंद्र बनाने की रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जा रही है।





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