1916 से 1918 के बीच बाल गंगाधर तिलक और एनी बेसेन्ट के नेतृत्व में चला होम रूल आंदोलन भारत की स्वतंत्रता संग्राम का महत्वपूर्ण मोड़ था। इसका उद्देश्य ब्रिटिश साम्राज्य के भीतर भारत को स्व-शासन दिलाना और राजनीतिक चेतना को पुनर्जीवित करना था। इस आंदोलन ने नरमपंथी और उग्रपंथी नेताओं को एक मंच पर लाया और स्वराज का बीज बोया।
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• आंदोलन की शुरुआत तिलक (अप्रैल 1916) और एनी बेसेन्ट (सितंबर 1916) ने की
• मुख्य उद्देश्य – भारत के लिए स्व-शासन (होम रूल) प्राप्त करना
• प्रेरणा आयरलैंड के होम रूल आंदोलन से मिली
• 1907 के कांग्रेस विभाजन और तिलक की कैद से आंदोलन कमजोर पड़ा था
• एनी बेसेन्ट ने 1915 में कांग्रेस में दोनों गुटों को जोड़ा
• तिलक की लीग महाराष्ट्र, कर्नाटक, मध्य प्रांतों में सक्रिय
• बेसेन्ट की लीग मद्रास, बॉम्बे, कलकत्ता में फैली
• प्रेस, भाषणों और शिक्षा से स्वराज का विचार फैलाया गया
• ब्रिटिश प्रतिक्रिया – 1917 में एनी बेसेन्ट की गिरफ्तारी, प्रेस एक्ट लागू
• लॉर्ड मोंटेग्यू की अगस्त 1917 घोषणा – भारतीयों को शासन में भागीदारी का वादा
• तिलक के इंग्लैंड जाने और बेसेन्ट की कमजोरी से आंदोलन धीमा पड़ा
• गांधीजी के सत्याग्रह और अहिंसा आंदोलन में यह समाहित हुआ (1920)
• प्रभाव – हिंदू-मुस्लिम एकता (लखनऊ पैक्ट), राष्ट्रीय भावना का पुनर्जागरण





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