वस्तु एवं सेवा कर परिषद भारत में एक संवैधानिक निकाय है जो कर दरों छूट और अप्रत्यक्ष कर प्रणाली में एकरूपता सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण सिफारिशें प्रदान करता है।
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- वस्तु एवं सेवा कर परिषद का गठन संविधान के अनुच्छेद 279ए के अंतर्गत 101वें संविधान संशोधन अधिनियम 2016 के माध्यम से किया गया था।
- इस परिषद की अध्यक्षता केंद्रीय वित्त मंत्री करते हैं और इसमें केंद्र तथा राज्य सरकारों के प्रतिनिधि शामिल होते हैं जिससे सहकारी संघवाद को बढ़ावा मिलता है।
- परिषद कर दरों छूट सीमा और वस्तुओं तथा सेवाओं को कर के दायरे में शामिल करने के संबंध में महत्वपूर्ण सिफारिशें करती है।
- निर्णय तीन चौथाई बहुमत से लिए जाते हैं जिसमें केंद्र के पास एक तिहाई और राज्यों के पास दो तिहाई मतदान अधिकार होता है।
- परिषद मॉडल कानून कर निर्धारण सिद्धांत और अंतर राज्य व्यापार में कर वितरण के नियमों के बारे में भी मार्गदर्शन प्रदान करती है।
- यह प्राकृतिक आपदाओं के समय विशेष कर दरों की सिफारिश कर सकती है और कुछ राज्यों के लिए विशेष प्रावधान भी निर्धारित करती है।
- परिषद समय समय पर बैठक आयोजित करती है जिसमें कर सुधार अनुपालन और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल बनाने पर चर्चा की जाती है।
- परिषद ने ई वे बिल प्रणाली ई चालान व्यवस्था कर दरों में कमी और अपीलीय न्यायाधिकरण की स्थापना जैसे महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं।





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