भारत और अमेरिका ने 7 फरवरी 2026 को एक अंतरिम व्यापार समझौते के ढांचे पर संयुक्त बयान जारी किया। यह तीन-चरणीय प्रक्रिया का पहला कदम है, जिसमें आगे अंतरिम और फिर द्विपक्षीय व्यापार समझौता होगा। इस फ्रेमवर्क में टैरिफ घटाने, कृषि क्षेत्र खोलने और रूसी तेल आयात पर अमेरिकी दबाव जैसे भू-राजनीतिक पहलू प्रमुख हैं।
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- 7 फरवरी 2026 को भारत-US अंतरिम व्यापार फ्रेमवर्क पर संयुक्त बयान जारी
- समझौता तीन चरणों में आगे बढ़ेगा: फ्रेमवर्क → अंतरिम → द्विपक्षीय व्यापार समझौता
- प्रस्तावित अमेरिकी टैरिफ दरें 18% पारस्परिक स्तर पर तय
- US Executive Order 14329 के तहत रूसी तेल आयात पर अतिरिक्त 25% ड्यूटी अस्थायी रूप से माफ
- यह छूट अमेरिकी निगरानी में “रोक” की शर्त पर आधारित, फिर से लागू हो सकती है
- भारत ने कृषि और डेयरी सेक्टर में “उच्च मूल्य आयात” के लिए बाजार खोलने पर सहमति दी
- हाई-टेक और AI सेक्टर में सहयोग को समझौते का बड़ा फोकस बताया गया
- अगले 5 वर्षों में $500 बिलियन व्यापार लक्ष्य तय किया गया
- भारत ऊर्जा, विमान, तकनीक उत्पाद, कोयला आदि आयात बढ़ाकर लक्ष्य पूरा करने की उम्मीद कर रहा
- स्टील, एल्यूमिनियम और ऑटो पर US सुरक्षा-आधारित टैरिफ इस फ्रेमवर्क से बाहर
- भारतीय राजनीति में समझौते को लेकर सरकार ने इसे उपलब्धि बताया, विपक्ष ने “समर्पण” कहा
- शेयर बाजार ने इसे भारत-US संबंधों में सुधार और निवेश अवसर बढ़ने का संकेत माना
- संयुक्त बयान में H1-B वीजा और रूसी तेल मुद्दे का सीधा उल्लेख नहीं किया गया
- अमेरिका ने ईरान से व्यापार करने वाले देशों पर भी 25% टैरिफ लगाने का अलग आदेश रखा
- लेख के अनुसार वैश्विक दबाव भारत को कृषि और ऊर्जा जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में खोलने को मजबूर कर रहा
- भू-राजनीतिक अस्थिरता के बीच भारत को कठिन रणनीतिक फैसले और मजबूत आर्थिक लचीलापन चाहिए





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