भारत अपनी स्वदेशी जीएजीएएन उपग्रह नेविगेशन प्रणाली के माध्यम से विमानन सुरक्षा, सटीक नेविगेशन और विभिन्न क्षेत्रों में स्थिति निर्धारण क्षमता को सशक्त बना रहा है।
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- जीएजीएएन का पूर्ण नाम जीपीएस एडेड जियो ऑगमेंटेड नेविगेशन है। यह भारत की स्वदेशी उपग्रह आधारित संवर्धित नेविगेशन प्रणाली है, जिसे इसरो और भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण ने संयुक्त रूप से विकसित किया है।
- यह प्रणाली वर्ष 2015 से संचालित है और ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम संकेतों की सटीकता, विश्वसनीयता तथा अखंडता बढ़ाकर विमान संचालन को अधिक सुरक्षित और प्रभावी बनाती है।
- उपग्रह आधारित संवर्धित नेविगेशन प्रणाली ग्राउंड रेफरेंस स्टेशन, मास्टर कंट्रोल सेंटर, अपलिंक स्टेशन और भूस्थिर उपग्रहों की सहायता से वास्तविक समय में नेविगेशन त्रुटियों का सुधार करती है।
- जीएजीएएन नेटवर्क में 15 भारतीय रेफरेंस स्टेशन, 2 मास्टर कंट्रोल सेंटर, 3 लैंड अपलिंक स्टेशन, 4 संचार नेटवर्क और 3 भूस्थिर उपग्रह शामिल हैं।
- इस प्रणाली में जीसैट 8, जीसैट 10 और जीसैट 15 उपग्रहों का उपयोग किया जाता है, जो विमानन सहित अनेक क्षेत्रों के लिए विश्वसनीय और व्यापक नेविगेशन सेवाएँ उपलब्ध कराते हैं।
- जून 2026 में भारत ने उदयपुर हवाई अड्डे पर इंडिगो ए320 विमान की पहली उपग्रह आधारित लैंडिंग प्रक्रिया सफलतापूर्वक संपन्न कर विमानन क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की।
- मई 2026 तक भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण ने 23 एलपीवी लैंडिंग प्रक्रियाएँ प्रकाशित की थीं तथा वर्ष 2026 के अंत तक इनकी संख्या 40 से अधिक करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
- जीएजीएएन का उपयोग विमानन के अतिरिक्त समुद्री परिवहन, रेलवे, सड़क परिवहन, आपदा प्रबंधन, रक्षा, दूरसंचार और भूस्थानिक मानचित्रण जैसे अनेक क्षेत्रों में किया जा रहा है।
- जीएजीएएन और नेविक के एकीकरण से भारत की स्वदेशी उपग्रह नेविगेशन व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़, विश्वसनीय तथा आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हो रही है।





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